एसटीएफ ने दबोचा एटीएम कार्ड क्लोनिंग गैंग,जाने क्या है कार्ड क्लोनिंग.....

एसटीएफ ने दबोचा एटीएम कार्ड क्लोनिंग गैंग,जाने क्या है कार्ड क्लोनिंग.....
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नई दिल्ली:
प्रयागराज की विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने  एटीएम कार्ड बदलकर ठगी करने वाली गैंग (कार्ड क्लोनिंग) के 4 सदस्यो को लखनऊ में स्थित विभूति खंड इलाके से दबोचा लिया है|  इन ठगियों के पास से काफी बड़ी संख्या में ATM कार्ड और क्लोनिंग मशीन बरामद की गई है| ये ठगी अपने पास बहुत सारे एटीएम कार्ड इस लिए रखते है ताकि उन्हें जैसा एटीएम कार्ड मिले वैसा ही बदल कर थमा दें जिससे किसी को इन पर आसानी से शक ना हो|

एसटीएफ ने दबोचा एटीएम कार्ड क्लोनिंग गैंग,जाने क्या है कार्ड क्लोनिंग.....

क्या है कार्ड क्लोनिंग ?
कार्ड क्लोनिंग की घटना आए दिन सामने आ रही है इससे पहले भी कई कार्ड क्लोनिंग गिरोह को पकड़ा जा चुका है|
कार्ड क्लोनिंग एक ऐसा टर्म है जिसके जरिए जालसाज किसी डेबिट कार्ड का क्लोन बना लेते हैं यानी वैसा ही एक डुप्लीकेट कार्ड तैयार कर लेते है और उस कार्ड का इस्तेमाल कर लोगो के बैंक से सारे पैसे निकाल लेते हैं| कार्ड क्लोनिंग की घटनाएं लगातार तेजी से बढ़ रही हैं। अब तो यूजर के डेबिट कार्ड को क्लोन कर दूसरे देश में ट्रांजेक्शन करने के मामले भी सामने आ रहे हैं।  

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कैसे होती है कार्ड क्लोनिंग? 
कार्ड क्लोनिंग के  खेल की शुरुवात एटीएम मशीन से होती है| जिसमें जालसाज़ स्कीमर नाम के एक डिवाइस को एटीएम,स्वैपिंग मशीन में फिट कर देते हैं| हर डेबिट कार्ड,क्रेडिट कार्ड में एक मैग्नेटिक स्ट्रिप होती है जिसमें अकाउंट से जुड़ी सभी जानकारी सेव रहती है।और जैसे ही कार्ड स्वाइप होता है| यह कार्ड की डीटेल्स को कॉपी कर लेता है | कॉपी किया गया डेटा एक इंटरनल मेमरी यूनिट में स्टोर हो जाता है। इसके बाद इस डेटा को एक ब्लैंक कार्ड में कॉपी कर लिया जाता है और फ्रॉड ट्रांजेक्शंस इन्हीं नकली कार्ड के जरिए अंजाम दिया जाता है। एटीएम के कीपैड में जैसे ही कोई यूज़र अपने कार्ड का पिन एंटर करता है तो ओवरले डिवाइसेज़ के जरिए कार्ड का पिन रीड कर लिया जाता है। इसके बाद जालसाज इन डिटेल्स के जरिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर धोखाधड़ी के अपराध को अंजाम देते हैं।